सुशांत सिंह राजपूत के को-स्टार संदीप नाहर का मौत से चार घंटे पहले लिखा सुसाइड नोट, वीडियो वायरल


Trauma से गुज़र रहा हूं

Trauma से गुज़र रहा हूं

सुसाइड नोट – अब जीने की इच्छा नहीं हो रही है। लाइफ में सुख दुख देखे, हर दिक्कत का सामना किया लेकिन आज मैं जिस Trauma से गुज़र रहा हूं वो बर्दाश्त के बाहर है। मैं जानता हूं कि सुसाइड करना कायरता है, मुझे भी जीना था लेकिन ऐसे जीने का भी क्या फायद जहां सुकून और Self Respect ना हो।

पत्नी से झगड़े

पत्नी से झगड़े

मेरी पत्नी कंचन शर्मा और उसकी मम्मी वीणू शर्मा, जिन्होंने मुझे ना समझा और ना समझने की कोशिश की। मेरी पत्नी हाईपर नेचर की है, उसकी personality अलग है, मेरी अलग जो बिल्कुल भी मेल नहीं खाती। रोज़ रोज़ के क्लेश , सुबह शाम बस क्लेश। मेरी अब ये सहने की शक्ति नहीं है।

कभी सुकून से जीते थे

कभी सुकून से जीते थे

इसमें कंचन की कोई गलती नहीं है क्योंकि उसकी नेचर ऐसी है। उसे सब नॉर्मल लगता है लेकिन मेरे लिए ये अब नॉर्मल नहीं है। मैं मुंबई में कई सालों से हूं। बहुत बुरा टाईम भी देखा है लेकिन कभी टूटा नहीं। बाउंसर रहा, डबिंग की, जिम ट्रेनर रहा। एक रूम किचन में छह लोग रहते थे, स्ट्रगल करते थे लेकिन सुकून था।

सब कुछ झूठ है

सब कुछ झूठ है

आज मैंने काफी कुछ अचीव कर लिया है। लेकिन आज शादी के बाद भी सुकून नहीं है। दो साल से लाइफ बिल्कुल चेंज हो गई है। और ये बातें मैं कभी किसी से शेयर भी नहीं कर सकता। दुनिया को लगता है कि उनका कितना अच्छा चल रहा है। क्योंकि वो सब हमारे सोशल पोस्ट या स्टोरी देखते हैं। जो कि सब झूठ होता है। इसके कहने पे डालता हूं। दुनिया को अच्छा दिखने के लिए। इमेज अच्छी रहे इसलिए डालता हूं।

पत्नी कहती थी आत्महत्या की बात

पत्नी कहती थी आत्महत्या की बात

लेकिन सच बिल्कुल उलटा है। हमारी बिल्कुल नहीं बनती। कंचन दो साल में 100 से ज़्यादा बार सुसाइड कर लूंगी के बारे में बोलती रहती है। तुम्हें फंसा दूंगी। देखो आज ये नौबत आ गई है कि मुझे ये स्टेप उठाना पड़ा रहा है। अतीत को लेकर लड़ती है, मेरी इज़्जत नहीं करती है। मुझे गालियां देती हैं, मेरी फैमिली के बारे में रोज़ बुला बुरा बोलती है। जो मेरे लिए सुनना अब सहन से बाहर है। इसमें इसकी कोई गलती नहीं है। क्योंकि ये दिमाग से बीमार है। मैं चाहता हूं कि मेरे जाने के बाद इसको कोई कुछ ना कहे। क्योंकि इसको कभी अपनी गलती का एहसास नहीं होगा। बस इसका ईलाज करवा दो। ताकि मेरे जाने के बाद जिसकी लाइफ में ये जाए खुशियां दे।

माता पिता के लिए काश जी पाता

माता पिता के लिए काश जी पाता

मैं अपने मम्मी डैडी को थैंक्स कहना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे वो सब दिया जो मैं चाहता था। मेरा एक्टर बनने का सपना पूरा किया। आज मैं जो हूं सब उनकी वजह से हूं। मुझे पता है आप सब बोल रहे होंगे कि उनके लिए क्यों नहीं जीता। मैं जीता, अगर मैं सिंगर होता। मुझा पता है जीने के लिए बहादुरी चाहिए लेकिन अभी तो मैं बस अपने मम्मी डैडी से माफी मांगता हूं उस हर पल के लिए जब मैंने उनका दिल दुखाया। मैं यहां उन्हें गर्व महसूस करवाने आया था और कुछ बन कर उनके लिए कुछ करना चाहता था।

शादी करके हो गई गलती

शादी करके हो गई गलती

लेकिन मेरी एक गलती, शादी ने लाइफ बदल दी मेरी। अब जीने की इच्छा नहीं है। पैसों को लेकर काम को लेकर हर दिक्कत झेला जा सकता है लेकिन ये औरत वाला क्लेश नहीं झेला जाता। और मुंबई ने मुझे काम बहुत दिया। इस मायानगरी को थैंक्स करना चाहता हूं।

बॉलीवुड की दुनिया अलग

बॉलीवुड की दुनिया अलग

मायानगरी बॉलीवुड में बहुत पॉलिटिक्स है। आपको बस उम्मीदें देकर आपका वक्त खा जाते हैं। और बाद में प्रोजेक्ट से रिप्लेस कर देते हैं।वो भी सब कुछ होने के बाद, अग्रीमेंट होने के बाद। यहां लोग भी बहुत प्रैक्टिकल होते हैं। कोई इमोशन नहीं होता है। बस दिखावे के लिए झूठी लाईफ में जीते हैं। वो वक्त ही अच्छा था जब कच्चे घर होते थे, लोगों में प्यार होता था, सब अपने लगते थे।

जीने का मन नहीं करता

जीने का मन नहीं करता

आज कल तो सब अपने होकर भी पराए लगते हैं। भीड़ में अकेला जीना भी एक कला है। कलयुग का दौर है, गलत करने वाले राजा हैं, खुश हैं। ईमानदारी से अच्छा बर्ताव करने से यहां लोग आपको छोटा समझते हैं और एटीट्यूड रखने वालों को सैल्यूट करते हैं। अलग मामला है। बस दिल नहीं अब जीने का।

मेरी पत्नी को कुछ मत कहना

मेरी पत्नी को कुछ मत कहना

प्लीज़ मेरे जाने के बाद कंचन को कोई कुछ ना कहे। बस उसमें गुस्सा बहुत ज़्यादा है और चीखना चिल्लाना, नासमझ है, अपने ख्यालों में लाइफ जीती है। अगर वैसा ना तो बवाल करती, दिमाग से बीमार है और ये सब इसमें से निकल जाए तो इसकी लाइफ में सब अच्छा हो जाए। और ये दूसरों को खुश रख सके। लेकिन मेरे साथ इसकी समझ बिल्कुल नहीं है। कान की कच्ची है। कोई भी इसको भड़का देता है अपनी इसमें समझ नहीं कि कौन सी बात सुननी चाहिए, कौन सी नहीं। बस हर बात का इफेक्ट मुझे लेना पड़ता।

दिल भर गया है

दिल भर गया है

मेरी सास तो बस हर बात पर पुलिस केस डालने के पीछे रहती हहै। मैं अलग भी हुआ फरवरी में कि थोड़ा स्पेस मिल जाए ताकि दिमाग शांत हो। कंचन अपने साथ टाइम बिताए, उसे अपनी गल्तियों का एहसास हो। मैं भी काम पर फोकस करूं। लेकिन नहीं। तभी भी सासू मां ने अपनी कानूनी किताब खोल ली और मुझे अंदर करवाने की बात कहने लगी कि मेरी बेटी से शादी करके भाग गया। यार हद होती है। कोई इंसान समझना ही नहीं चाहता। दस साल से कंचन मुंबई में है। मैं थोड़ी पंजाब से लाया था उसे। तब बोलती है मैं दस साल से उसके साथ रहती थी और हां अपनी बातों से पलटना और झूठ बोलना कोई इनसे सीखे। इनकी बेटी भी झूठ बोलती है। बातों से पलट जाती है। अब झूठे इंसान को भला कौन सच साबित कर सकता है।

ऐसा लगता है, मैं विलेन हूं

ऐसा लगता है, मैं विलेन हूं

मेरे अतीत के लिए लड़ती है लेकिन अपने एक्स बॉयफ्रेंड से आज तक बात करती है। बस वही बात है ना, खुद की कमियां नहीं दिखती हैं। अगर केवल बात भी करती तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि आपकी ज़िंदगी है आपको जिसके साथ अच्छा फील होता है आप बात करोगे, लेकिन फिर मुझे मेरे अतीत के लिए रोज़ ताने मत मारो। असल में कंचन की कहानियों में मैं विलेन हूं, ये मेरे बारे में बहुत बुरा सोचती है। और अपनी दोस्तों को सबको ऐसे बताती है मेरे बारे में जैसे मैं इंसान नहीं कोई राक्षस या भूत हूं।

मेरी कोई वैल्यू ही नहीं

मेरी कोई वैल्यू ही नहीं

चलो कोई नहीं। सासू मां की धमकियों से मैं फिर कंचन के पास आ गया। वही नरक लाईफ। वही क्लेश। वही तानें मारना। वो जिस बात पर हज़ार बार लड़ चुकी है वही रिपीट टेलीकास्ट रोज़ चालू। ये बात भी सच है कि सवार नर्क होता है लेकिन शादी के बाद से शुरू होता है और ये शादी 2019 में इसने अपनी ज़िद और मरने की धमकियां देकर कि फांसी पर लटक रही थी। मुझे भी तरस आया कि बेचारी का कोई नहीं। तब मुझे ये नहीं पता था कि मेरा तरस किया हुआ मुझे इतना भारी पड़ेगा। ये रोज़ मुझे यातना देगी। मेरी कहीं कोई वैल्यू नहीं रखती, भाव नहीं देती, मेरा किया हुआ कभी नहीं गिनती।

बहुत पहले कर लेता सुसाइड

बहुत पहले कर लेता सुसाइड

मैं बहुत पहले कर लेता सुसाइड लेकिन मैंने अपने आप को टाइम दिया चीज़ें ठीक करने का, हर वक्त motivate किया लेकिन रोज़ वही क्लेश होते हैं। इस चक्रव्यूह में फंस चुका हूं। निकलने का कोई रास्ता नहीं है इसके अलावा। अब मुझे ये स्टेप खुशी खुशी लेना होगा। यहां इस लाइफ में बहुत नर्क मिल रहा, शायद यहां से जाने के बाद की लाईफ कैसी होगी मुझे पता नहीं लेकिन मुझे इतना पता है कि मैं वो सह लूंगा। एक ही गुज़ारिश है कि मेरे जाने के बाद कंचन को कुछ मत बोलना बस उसका दिमाग का ईलाज ज़रूर करवा देना।



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